Wednesday, May 4, 2011

शायद रात कोई बर्फ पिघला था !

दिन कुछ बदल गए
रातें भी बदली ...



पर कुछ बूँदें हैं
अभी भी उस शाख  के
घोसले में ...


शायद रात कोई बर्फ पिघला था
और पिघला था एक दिल ..


ये देखकर की आज
फिर से उसके घर में
खुशियों की बरसात हुई है ...

1 comment:

  1. बहुत ही एहसासपूर्ण...दिल को छु गयी रचना...बहुत सुंदर।

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