Thursday, May 5, 2011

बस तेरे लिए मेरे चाँद...


तेरे  पूर्ण रूप का निर्माण कर 
मैं तेरी कमियाँ देख 
हतप्रभ  हो  गया मेरे चाँद ,

अथाह प्रयत्न किये 
तेरे काले धब्बे को मिटा 
तुझे निष्कलंकित बनाने की ,

पर फिर 
अपने प्रयास को थाम लिया मैंने 
बस  तेरे लिए  मेरे चाँद ,

क्योंकि 
तुझे नज़र ना लगे 
उन तारों की जो 
मुझसे बहुत दूर हैं 
और तू मेरे बहुत करीबहै मेरे चाँद ,

तुझे 
अमावस की पूरी रात 
मैं अपने से दूर रखता हूँ
बस तेरे लिए मेरे चाँद ,

क्योंकि 
तेरे  मेरे जैसे चकोर के पास रहने से
वो दिव्यमान  सूरज तेरा साथ न छोर दे ..
तेरी चाँदनी मुझे प्यारी है मेरे चाँद ..

..निशांत 

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