Sunday, May 15, 2011

रिश्ता आज और कल का !

आज उदास है 
बैठा है कल के आस में

लो आ गया वो
कई तरंगो के संग

और 
आज ने उसका स्वागत
किया 
कुछ 
मधुर धुन निकले 
इस मिलन से 
उसके वीणा से 
उस कल के लिए 
जो इस उपहार को 
अपना लेगा
बस 
आज के लिए 
जो राह तकता रहता है 
निश्चल भाव से 
उस कल के लिए 


कितना प्यारा रिश्ता
है आज और कल का 
न फ़साना बेखुदी का 
न तराना कोई क्षल का 

हाँ वो ही तो है 
जो आएगा 
हर वक़्त जब 
आज होगा उदास 
वो ही है उसका सहचर 
वो ही है सच्चा हमसफ़र 
हाँ वो ही है  ......

3 comments:

  1. बहुत सुंदर रिश्ता है आज और कल का ! बहुत अच्छी रचना ।

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  2. कितना प्यारा रिश्ता
    है आज और कल का
    न फ़साना बेखुदी का
    न तराना कोई क्षल का
    waakai

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  3. खूबसूरत भाव ..अच्छी रचना

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Kshitiz

Wo kshitiz hai paas nahi aata, Jaise sach ho ,jo raas nahi aata Tum aaye the lekar Josh -o -junoon, Ab kya hua,kahte ho kaash nahi aata !...