Saturday, May 14, 2011

वो पथिक



धुप छाँव
दिन रात ,
पतझर 
वसंत
बरसात ,
वो सहता है ,
मंजिल उसका 
रस्ता ताके ,
बस वो 
सफ़र पर 
चलता है,
होंगे पहचान 
उसके पद चिन्ह,
वो पथिक 
हमेशा कहता है 

5 comments:

  1. भावपूर्ण अभिव्यक्ति |बधाई
    आशा

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  2. खुबसूरत भावाव्यक्ति के लिए बधाई

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  3. बहुत खुब। चलना ही तो जिदंगी है।

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