Monday, May 16, 2011

बस ढूँढू तेरी चुनरी प्रिये !


कौन ले मेरी सुधि प्रिये 


तड़पाती है नदिया की लहरे 


जाता हूँ जब भी   तीरे


बस ढूँढू   तेरी चुनरी प्रिये !


पत्ते मुस्काते है जब भी 


आये पवन जब वेग लिए 


हूक ह्रदय में दे  जाती है 


न जाने हम क्यों बिछरे 

बस ढूँढू   तेरी चुनरी प्रिये !



स्वेद की बूँदें है तन पे 


मेघ खेलता है मुझसे 

कौन धुप में छाँव  करेगा 


कष्ट हरेगा कौन  प्रिये 



बस ढूँढू   तेरी चुनरी प्रिये !



पुष्प खिलते  हैं जब भी 


तितली को देखूं हँसते 


खुशबू संग जब वो आती है 


याद आये तेरी प्रीत प्रिये 



बस ढूँढू   तेरी चुनरी प्रिये !


बस ढूँढू   तेरी चुनरी प्रिये !












2 comments:

  1. बेहतरीन भावाव्यक्ति , सम्प्रेषण की अद्भुत छमता बधाई

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  2. bhut sunder bhaavabhivakti hai... very nice...

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