Friday, May 13, 2011

नए सफ़र पर अब राहें बुलाएगी !


सैलाब आया है 
ठंडी लहरों के संग 
अब तपते  शहर 
को  राहत मिल जायेगी 


पुराने सीपों को 
नवजीवन वो दे देगी 
नए सीपों से ये 
साहिल मुस्कुरायेगी 

रेत के सपने अब 
आँखों को न सतायेंगे 
ये मद्धम लहर 
राह सबको दिखायेगी 

मिट जायेंगे ,
पुराने निशाँ सारे  
नए सफ़र पर 
अब राहें बुलाएगी ...

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