Wednesday, November 23, 2011

हकीकत से हंसीं है ख्वाब देखा

इस  शहर में आइनों का  शबाब देखा  
हकीकत  से  हंसीं   इक  ख्वाब  देखा !!  

काँटों के सेज सजे मिले हर मोड़ पे  
मगर  काँटों में मुस्कुराता गुलाब देखा !!

कई सवाल उलझे थे  धागों की तरह 
उंघते चेहरों में उनका जवाब देखा!! 

बिक  गए  शज़र  कौड़ियों  के  दाम 
साँसों का कुछ अजीब  हिसाब  देखा!! 

खामोश  रातों  में  रतजगा करते 
इक  अधलिखा हुआ  किताब  देखा !!  

सवेरा हुआ तो इल्म हुआ "नील" 
कि कल रात महज़ इक ख्वाब देखा !!



हर चेहरे में ढूंढा किया है , उनका अक्श


अजनबी  शहर  से  कुछ  ऐसा  सिला  मिला 
बेगानों  के  सफ़र  का  बस  काफिला  मिला 


वो  आये  लहरों  की  तरह से  ज़िन्दागनी  में 
हमको मगर  समुंदर सा इक फासला  मिला 


जब  भी  कदम  रुके  वो  साँस  बन  गए 
हर  हार  में , उनकी  दुआ  से ,हौसला मिला 


हर  चेहरे  में  ढूंढा  किया  है , उनका अक्श
मगर बेरुखी  का ,बस हमें  सिलसिला  मिला 


जब  सभी  को  है  खबर  उनकी  परश्तिश  की   
तो  क्या  फिकर, उनसा न  कोई,  बागवां मिला 


ले  आरज़ू  इक  दर्श की  फलक को तकते थे 
मगर ओढ़  बादल को  सदा,वो  आसमा मिला 



Tuesday, November 22, 2011

बस ये अदब शेर नहीं इक दुआ है


बस ये अदब शेर नहीं इक दुआ है ,
मेहर से आपके मुमकिन हुआ है ,

पता नहीं कि ये कितना मशहूर है ,
पर है भरोषा की रूह को छुआ है ,

जो आग दिल में जला करती है ,
बस ये उसी का तो बढ़ता धुँआ है ,

साहिलों पे बैठ सुना करता हूँ मैं ,
ये लहर है जिसने मदहोश किया है ,

ये ही कल था ,ये ही मेरा आज है ,
ये ही तो सुनहरे कल का जुआ है ,

जीतेंगे नहीं तो रुकेंगे भी नहीं  सनम ,
जब खुद रब आकर मेरे संग हुआ है