Sunday, April 22, 2012

ख्वाब बुला रहें हैं

नींद से जागे तो ज़िन्दगी बदल गयी ,
कोई चिन्गाड़ी लगी ऐसी की शम्मा जल गयी ...

तेरे दुआओं की रहमतें थी शायद ,
कि  हर   बला  आते -आते टल गयी ..


ख्वाब बुला रहें हैं मुझे ज़िन्दगी , कल फिर  रूबरू हूँगा तो बता देना ...
कोई तोहफा देना मुझे तू या  फिर किसी बात कि सजा देना ...

कई पहेलियों को सुलझाना था मगर चाहे जैसी तेरी मर्ज़ी
तू राह दिखाना  रूक कर   मुझे या फिर इलज़ाम  लगा देना


अब ख्वाईशें पूछती हैं पता मुझसे ,
कोई मुहब्बत सिखाये तो अच्छा है ..

नहीं पढनी अब ज़माने भर की किताब  ,
कोई आँखों से ही पढाये तो अच्छा है ...


आज की शाम न जाने कयामत क्या होगी ,
साथ होगी ज़िन्दगी या फिर खफा होगी ...

उनको मालूम नहीं की क्या मायने हैं उनके ,
वो गुनाह समझती है हमें मगर वो ही दवा होगी ...

ये तिश्नगी कैसी है कैसी ये चाहत है ,
हाल -ए-दिल क्या कहें अब ये दिल की उल्फत है ..

दो पल की है ज़िन्दगी दो जहां के उलझन ,
काँटों के राह पे क्यूँ चलती मुहब्बत है ...

तेरी आहट याद है सारे गम भूल गए ,
क्या थी हस्ती अब क्या है हम भूल गए ..

क्या पायेंगे कुछ सोचा नहीं वीराने में ,
महफ़िल के रस्ते भी सनम भूल गए ...

2 comments:

  1. तेरे दुआओं की रहमतें थी शायद ,
    कि हर बला आते -आते टल गयी ..बहुत ही खुबसूरत
    और कोमल भावो की अभिवयक्ति....

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