Tuesday, May 1, 2012

कितने पूनम बीत गए


खिड़कियाँ  बहुत  हैं  उस  नीचले  मकान  में 
दीदार-ए-चाँद  के  लिए  सारे  इंतज़ाम  है 


मगर  उपरी  मकान  के  वासिन्दों  से  मुलाक़ात  हुए  कितने  पूनम  बीत  गए ..

1 comment:

Kshitiz

Wo kshitiz hai paas nahi aata, Jaise sach ho ,jo raas nahi aata Tum aaye the lekar Josh -o -junoon, Ab kya hua,kahte ho kaash nahi aata !...