Tuesday, May 8, 2012

अर्श पे टंगे ख्वाब



स्याह रात ,अर्श पे टंगे ख्वाब ,
मैं और मेरी अधलिखी किताब  
कुछ पहेलियाँ ज़िन्दगी की 
कुछ मासूम जवाब

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सुरूर जब होने लगे अपने वजूद का 
तब आंधियां आती हैं इम्तेहान को
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उम्मीद जब हंसने लगे खुदाई पर तब जागना जरूरी है 
जब यकीन न हो खुद की परछाई पर तब जागना जरूरी है


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क्षण भर का प्रेम भी तेरा जैसे झील की गहराई है 
जीवन के भंवर में उसने हर पल लाज बचाई है
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एहसासों को देखते हैं ,एहसानों को याद रखते हैं 
हम रब की इन्ही तोहफों से खुद को आबाद रखते हैं

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बेशक रब्बा मेरे चाँद में भी दाग है ,
मगर वो अमावस में छुपता नहीं ........

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ए सफ़र ज़िन्दगी की ,ए बशर ज़िन्दगी की ,बता तेरा इरादा क्या है 
मैं तो चल ही रहा हूँ तेरे साथ ,और मेरा ,ठिकाना क्या है

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तुझसे न जाने क्यूँ राबता हो गया 
न जाने क्यूँ ये सिलसिला हो गया 
मेरे रूह से क्यूँ आवाज़ आने लगी 
तू ही सफ़र में छाँव तू ही हौसला हो गया
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आज इक पुराना ख़त मेरे पुराने संदूक से मिला 
ज़िन्दगी ने उसे पढने का मौका तक न दिया   
खोला तो कुछ नहीं लिखा था
कुछ एक तश्वीर उभर आई थी उस पर 
शायद आंसू मोती बन चुके थे ....

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कुछ लम्हे बहुत याद आते हैं , 
बस जाते है दिलों में , ज़ख्मो पे मरहम लगाते हैं ..... 
उन्ही लम्हों को समेटा है अपने एहसासों में समायें हैं 
वो लम्हे मेरे अपने हैं मेरे साथी ,मेरे हमसाये हैं
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कुछ एक पल की ज़िन्दगी है ,कुछ सपने हैं ,कुछ उलझन भी 
कुछ रिश्ते मिलते है दिल से ,कहीं तरसे दिल की धड़कन भी
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मेरे पैमाने में शराब कहाँ ,वो तो बस ,कुछ धडकनों को समेटे हैं 
कुछ दूरियां मिट जाती हैं ,मेरे माजी ,मेरी दुनिया ,मेरे रिश्तों को समेटे हैं

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हर मोड़ पे सहारा  ढूंढता नहीं , सहारे की आदत न हो ,दुआ करना 
न चाहता हूँ की तू परेशान रहे ,जागना सही ,नहीं रतजगा करना

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कुछ अपने कुछ दूजों के ख़्वाबों के साथ
ये ज़िन्दगी कट जाए बस कुछ एहसासों के साथ

3 comments:

  1. वाह बहुत खूब बहुत ही बढ़िया लिखा है आपने शुभकामनायें समय मिले आपको तो कभी आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है http://mhare-anubhav.blogspot.co.uk/

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  2. कुछ एक पल की ज़िन्दगी है ,कुछ सपने हैं ,कुछ उलझन भी
    कुछ रिश्ते मिलते है दिल से ,कहीं तरसे दिल की धड़कन भी....खुबसूरत अल्फाजों में पिरोये जज़्बात....शानदार |

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  3. pallavi ji
    sushma ji
    aapke sneh ka aabhari hoon
    saadar

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