Saturday, September 1, 2012

शिरत से ही पहचान है

सूरत  से  नहीं  शिरत  से  ही  पहचान  है 
चाँद  बेदाग़  नहीं  फिर  क्यूँ  तू  अनजान  है 

क्या  ला  सकोगे  चांदनी  लाखों  दिए  जलाकर  भी 

5 comments:

  1. सूरत न देखो सीरत को देखो ....अच्छी रचना
    कृपया यहाँ भी पधारें -http://veerubhai1947.blogspot.com/
    सादा भोजन ऊंचा लक्ष्य

    स्टोक एक्सचेंज का सट्टा भूल ,ग्लाईकेमिक इंडेक्स की सुध ले ,सेहत सुधार .

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  2. अच्छा है चाँद से आप ने पहचान लगाई है
    दिये क्यों लगाये कोई चाँदनी जब खुद आई है !

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार (02-09-2012) के चर्चा मंच पर भी की गयी है!
    सूचनार्थ!

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  4. अच्छा लिखा है आपने शुभकामनायें ....

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  5. pallavi ji bahut aabhaar
    veeru bhai,sushil ji bahut aabhaar
    mayank daa bahut dhanyavaad aapke sarahana aur protsaahann ke liye
    aasha hai accha aur saarthak likhta rahunga

    saadar aabhaar

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