Sunday, October 14, 2012

चाहिये दोस्तों अब कितना जवाब


चाहिये दोस्तों अब कितना जवाब ,
साँस लेने का होता नहीं है हिसाब !

देख कर आपकी नज़र की दुआ ,
भूल जायें जहाँ भर के हम गुलाब 

जाग कर ख्वाब का सामना कीजिये,
नींद की ज्यादती हो न जाये खराब

आईये कि ये शहर पुकारा करे ,
होंगे अपने गली के भले ही नवाब 

सुन साकी कि हमको दो हर्फ़ बहुत, 
क्या पैमाना ख़ास ,क्या महंगी शराब 

हर घड़ी छोड़ देता है वाजिब सवाल,
ए खुदा! तू भी कितना है लाजवाब 

दीजिये नील स्याही काग़ज़ कलम
लीजिये बावफा लिख दिया इक़ किताब 

बावफा : loyal

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