Monday, January 30, 2012

आहिस्ता -आहिस्ता !!


लोग रूह-ए-ख़ास  बन   जाते  हैं, आहिस्ता  आहिस्ता 
दूर   होकर  फिर  साथ  निभाते   हैं ,आहिस्ता  आहिस्ता !!

ओस   की   बूँदें   ही   काफी  हैं  प्यास  बुझाने  को 
इक  याद  में  मकान  बनाते  हैं, आहिस्ता  आहिस्ता !!

लोग  मलमल  के  कपडे  पहनते ही   क्यों  हैं   
जब  यहाँ  आग  लगाते  हैं , आहिस्ता  आहिस्ता !!

शहद  चखने   की  आदत    है   सब  को  मगर 
क्यों  वो  नीम  पकाते  हैं  ,आहिस्ता  आहिस्ता !!


ए  "नील" ,उन्होंने खूब   बेचे    होंगे कारतूस,मगर    
हम रोज़ कबूतर उड़ाते हैं ,आहिस्ता आहिस्ता !!

Saturday, January 28, 2012

तेरे जाने बाद !!


तिनका तिनका जो ख्वाब बुने थे हमने 
घोसला उम्मीदों का बना उनसे ,तेरे जाने बाद !!

मिलकर जिस बगिये को सींचा किया करते थे 
मोहब्बत के गुल हैं वहाँ खिलते ,तेरे जाने के बाद !!


है मौजूद अभी तक बरगद वहीं  पर  जाना   
पर झूला है सुना कब से, तेरे जाने के बाद !!


तेरे दिए शहद को संग रखते हैं हरदम 
हर राह गुज़र  को चखा देते , तेरे जाने बाद !!

बड़े प्यार से हमको ,तुने जो दो लफ्ज़ दिए थे  
हमसफ़र वो ही हैं  हमारे ,तेरे जाने के बाद  !!


दिल की धड़कन संग वो लफ्ज़ थिरकते हैं 
बन चुके हैं अब वो नगमे ,तेरे जाने के बाद !!



मैं झील हूँ

मैं  झील  हूँ   
है इंतज़ार  मुझे  लहरों  का
समुंदर  तक   पहुंचा  दे  न  मुझे  ए  नदी  ...

Monday, January 16, 2012

तुम्हारी आँखों ने

मन को किया स्वीकार ,तुम्हारी आँखों ने 
किया सम्पूर्ण मेरा विस्तार, तुम्हारी आँखों ने 

धड़कन में रब ने ऐसे तुम्हे बसा डाला
किया हर भ्रम को निराधार ,तुम्हारी आँखों ने 

चन्द्र , तारिका, निर्झर सभी निरर्थक थे 
 ढूँढा मुझमे चित्रकार ,तुम्हारी आँखों ने


बिखरे रिश्तों में आनंद कभी न ढूंढ सका 
कर सजग किया उपकार ,तुम्हारी आँखों ने 


तनहा  रातें तपती  थी  ,पूनम की आंच में 
हर लिया सारा अन्धकार,तुम्हारी आँखों ने 

नदियों सा अर्पण किया स्वयं को जब मैंने 
दिया सागर सा मुझे प्यार,तुम्हारी आँखों ने 

हे प्रियतम  ! आनंदित "मन " तेरा आभारी है 
दिया जीने का आधार ,तुम्हारी आँखों ने 

दिया जीने का आधार ,तुम्हारी आँखों ने 






Friday, January 6, 2012

कुछ सवाल रूह के भी है

बहार  चाँद  छुपने  बाला  है  बादलों  में
सोचा  दीदार  कर  लूं  जनाब  का
क्या  भरोसा  इस  मौसम  में
क्या  भरोसा   अब  अजाब  का


कल  सूरज  की  किरणों  को  समेटना  है
तो  ख्वाब  को  नींद  बख्शनी  होगी
आज  जिस  तरन्नुम  को  सिखा  है फिजाओं से
कल 
  किसी  ग़ज़ल  में  रखनी  होंगी 


दुआएं  ख्वाब में भी आ जायेंगी
इसका  ख्याल   हमें  भी  है
आज  चलता  हूँ  मेरे  दोस्त
कुछ  सवाल  रूह  के  भी  है 

कुछ  सवाल  रूह  के  भी  है 

Wednesday, January 4, 2012

वाइज़ भी इक मशहूर दीवाना बन गया


याद  जब  भी  आई  उनकी ,इक तराना बन गया 
कितने शायर दिल के दर्दों का फ़साना  बन गया !!


बेनामी  में   सेहरा-ओ- गुलशन  सब   थे   वीराने 
हमदर्द मेरा  भी अब  ये ज़ालिम ज़माना बन  गया !!


इक तश्वीर खीच जाती  है उनकी, हर ग़ज़ल-ए-ख़ास में 
वो मेरा नूर-ए-नज़र  और मैं उनका आइना बन गया!! 


पुछा किये सब कि गुस्ताखी दिल कि थी या हमारी 
लगता है  सादगी से मिलना ही  हरजाना बन गया !!


कुछ ऐसी सिकाफत है गम-ए-जुदाई की  ए "नील "
कि वाइज़ भी इक बहुत मशहूर दीवाना बन गया !!


वो नजीब थे हरदम , उनकी नज़ाफ़त महफूज़ है 
वो काशिफ़ बने  हमारे और  आशियाना  बन गया !!












Tuesday, January 3, 2012

मुसाफिर !

कुछ अफ़साने रूह में उतर जाते हैं मुसाफिर
कुछ उम्मीद टूटकर बिखर जाते हैं मुसाफिर !!



आइना  लेकर  चलते   हैं  बेगानों  की तरह 
खुदी   को  देख   क्यों डर  जाते  हैं  मुसाफिर !!


शज़र को सींचते हैं  खून पसीने से मगर 
कुछ फल के लिए ,क्यों झगड़ जाते हैं मुसाफिर !!


ज़िन्दगी चलती है ,इसे चलना ही होता है
जो ख्वाब देखते हैं ,संवर जाते हैं मुसाफिर !!

सुना है दरख़्त पतझर में  वीरान होता है 
मगर अब पल भर में ,बिछड़ जाते हैं मुसाफिर !!

ए "नील" परछाइयों से क्यों आस करें  हम 
अँधेरे में वो   वायदे से , मुकर जाते हैं मुसाफिर !!












शोर !

बंद  कमरे  में  शोर  मचा  रहा  है 
लोग  आज  उसके  चेहरे    को   देखते  हैं ..

उसे  कल  की  फिकर है  जब  शहर  बहरा  हो  जाएगा  !

Monday, January 2, 2012

उसके पतंग की डोर टूट गयी है 
बहुत नौसिखिया पतंगबाज था वो ...

आज दूर किसी मोहल्ले में फिर किलकारियां गूंजेगी... 

Sunday, January 1, 2012

बेपनाह मुहब्बत

बेपनाह   मुहब्बत  में  कुछ  ऐसे  कसूर  हो  गए 
हर महफ़िल हर नज़र  से  हम  दूर  दूर   हो  गए 

और  कुछ  न  हो  मिला    इस  खामोश  सफ़र  में 
बेखुदी  के मीठे चोट से  हम बेबस  ज़रूर  हो  गए 

कातिल  बना  है  मुनसिब  और  पूछता  है  बार  बार 
कि  आप   किस  गुनाह  में  शामिल   हुज़ूर  हो  गए 

हमने  कहा   की  क्या सजा   है  दीद  -ए  -यार   की 
वो   मुस्कुराए   इस  तरह   की  दिल -ए -नूर  हो  गए 

फिरदौस  भी  मिल  जाए  गर  तो  क्या  करेंगे  हम  
हर  मोड़  पे  जब  रिश्ते  अपने  ना -मंज़ूर   हो  गए 

दिल  की  धड़कन   को  ज़रा उनको भी सुना देना हवा  
की  क्यों वो   अजनबी मेरे शाम  -ए -सुरूर   हो  गए 

ए  खुदा  ,तू  है  अगर  तो  इक  जवाब   बस  दे  मुझे    
कि  बेवज़ह   क्यूँ    ख्वाब   सारे   चूर   चूर  हो  गए 

फिर   भी  हमें  सुकून   है   वो  अदब   से  होंगे  वहाँ  
क्या  ये  कम  है  ,वो  हमारे  गम  के   गुरूर   हो  गए 



पतंग की डोर टूट गयी

पतंग  की  डोर  टूट  गयी
अब  किलकारियां  गुजेंगी   फिर  से

कुछ  वीरान  सा  था  ये  मुहल्ला
अब  गुलशन  यहाँ  भी  महकेंगे

शुक्र  हो  उस  नौसिखिये  पतंगबाज़ का
की  उसने  लोहा  नहीं  लिया  उन  अल्हड़  पतंगों  से

आज  तो  एक  खुशी  उसने  तोड़  गिदायी  है
दूर  तनहा  उस  पुराने  छत  से

पत्तंग  की  डोर  टूट  गयी
अब  किलकारियां  गूंजेगी  फिर  से ......

ये सपने !!

कभी दोस्त  बनकर हंसाते है ,ये सपने
कभी माँ की तरह सुलाते हैं ,ये सपने !!

कोई बुनता होगा सपना मेरे खातिर
अक्सर  मुझे  बताते   हैं  ,ये  सपने !!

यूँ तो शहर बन चूका हर गाँव है 
गाँव को भी शहर बनाते हैं,ये सपने !!


दिन रात परखता है हर चहरे को जो 
उनकी असलियत भी दिखाते हैं ,ये सपने !!

रूह  की  सेज  पर  ये  सोये  रहते  हैं  
हरदम  नींद  से  जगाते  हैं  ,ये  सपने !!

"नील"  अकेला   नहीं  है   राह  में
राहबर  का  फ़र्ज़  निभाते  हैं  ,ये  सपने !!