Thursday, February 2, 2012

खरीदार

दिल हथेली में लेकर बाँटने निकला है वो 
कमबख्त ,कोई मुनासिब खरीदार नहीं मिलता 

किसी ने सच कहा है की ज़ज्बातों का कोई मोल नहीं !

बेखुदी  में  हम मिट गए  ,क्या यही अंजाम है
है नशा तो उनकी अदा का ,लेकिन  हमारा जाम है

जिस किताब का उसने मोल किया बड़े नाज़ से 
उसके हर पन्ने पे  देखो ,बस उन्ही का नाम है

भला किससे करता हाल-ए-दिल अपना बयान 
क़त्ल होना अब आशिकों का इस शहर में आम है 

दर्द-ए-दिल को उनका तोहफा समझ कर रखा 
फिर क्यूँ उनसे नाता अपना,आज यूँ बदनाम है 

ये गम हमें हरगिज़  नहीं कि वो हमें भूले सनम 
पर ये गम है  नील कि मुहब्बत ही मेरा इलज़ाम है 

यूँ तो उन्होंने हमको रुखसत  कब का कर दिया
हमारी नगमो का मगर रूह से उन्हें सलाम है 

आशिकों से उनकी मंजिल न पूछना तुम कभी
हर दिल का दरवाज़ा ही उनका सही मुकाम है 

Wednesday, February 1, 2012

मेरी अमानत तेरे संग होगी

हो मयस्सर अब वस्ल का मौसम 
ये मुमकिन नहीं है  मेरे हमदम 
तुम  अब नज़्म को ही चख लेना 
तुम उन्हें दिल में रख लेना 

आईना भले संग न रहे 
पर मेरी अमानत तेरे संग होगी 
मेरे दिल के अफसानों में 
तुम्हारे वफाओं की महक होगी 

मेरा पयाम लिफाफे में है 
क्यूंकि ज़माने की नज़र लग जायेगी
उसे इक नज़र से परख लेना 
खोल कर एक बार उसे तुम भी चहक लेना 

पीपल के पत्ते जब भी गिरते हैं 
लगता है तेरे घुँघरू की झनक है 
मेरे आँगन में है एक आम का पेड़ 
उसके मंज़र तेरे बालियों से हैं ..

उन्हें देख कर तेरी दुआएं याद आती हैं 
वो मासूम सी फिजाएं बहुत तडपाती हैं 
उन्ही लम्हों को आज चुन रहा हूँ 
बाया सा एक नीर मैं भी बुन रहा हूँ 

तेरे सपनो के पंछी उड़ते रहे
साड़ी कायनात में झूमते रहे
गर थक जाएँ कभी सफ़र में वो 
तो उन्हें प्यार से उस नीर में रख देना ..

हो मयस्सर अब वस्ल का मौसम 
ये मुमकिन नहीं है  मेरे हमदम 
तुम  अब नज़्म को ही चख लेना 
तुम उन्हें दिल में रख लेना ..


Kshitiz

Wo kshitiz hai paas nahi aata, Jaise sach ho ,jo raas nahi aata Tum aaye the lekar Josh -o -junoon, Ab kya hua,kahte ho kaash nahi aata !...