Friday, February 1, 2013

उमीदों का दामन क्यों हैं सब उतारे हुए



उमीदों का दामन क्यों हैं सब उतारे हुए
क्या हुआ जो शज़र के फल न तुम्हारे हुए !!

सारे मुश्किलात मिट गए पल भर में में
जब स्वयं कन्हैय्या , हमारे खेवनहारे हुए !!

मरुभूमि में भी हरियाली आ गयी
जब हम सब  दीनवत्सल  के, द्वारे हुए!!

हीरे - मोती का हम अब क्या करें
बस इक साथ प्रीतम का  , हमें सँवारे हुए !!

चिराग -ए -दिल जलती रहेगी बदस्तूर
क्या हुआ , जो बेदर्द चाँद -सितारे हुए

दिए बनाने वाले कुम्हार से पुछा करना
कितने घर -आँगन में , कल उजियारे हुए !!

ये रूप है तेरा तब तक ही  ओ "नील "
जब तक तेरे सारे आचरण,  प्यारे हुए !!


२८ जून २०११

3 comments:

  1. हीरे - मोती का हम अब क्या करें
    बस इक साथ प्रीतम का , हमें सँवारे हुए !!..

    प्रीतम के साथ के अलावा ओर कोई उम्मीद भी क्यों ... सब कुछ तो मिल ही गया ... बहुत खूब ...

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  2. बहुत बढ़िया...
    दिए बनाने वाले कुम्हार से पुछा करना
    कितने घर -आँगन में , कल उजियारे हुए !!

    लाजवाब एहसास...
    अनु

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  3. बहुत धन्यवाद दिगंबर जी
    बहुत आभार अनु जी

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Kshitiz

Wo kshitiz hai paas nahi aata, Jaise sach ho ,jo raas nahi aata Tum aaye the lekar Josh -o -junoon, Ab kya hua,kahte ho kaash nahi aata !...