Friday, November 8, 2013

अभी तो बस शुरू हुआ है सफर



अभी तो बस, शुरू हुआ है सफर देखते रहो,
कि जब तलक ना हो कोई भी असर देखते रहो !

किनारे से नहीं आयेगी नज़र देखते रहो,
समंदर मे अब तुम भी उतर देखते रहो !

कुछ एक कूचा ,कूच एक डगर, बदल गये तो क्या,
अभी तो बदलेगा ये सारा शहर देखते रहो !

कई पर्दे , कई धूल , रोकेंगे अभी रास्ता,
संभाल कर ये अपनी आँखें मगर देखते रहो !

कहाँ कहता था मैं कभी ऐ मेरे हमदम,
कि मैं जो देखूँ तुझे तुम भी इधर देखते रहो !

कुछ एक नज़्म के दिये जले फिर काग़ज़ों पे आज,
यही है "नील" का छोटा सा इक घर देखते रहो !

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार को (09-11-2013) गंगे ! : चर्चामंच : चर्चा अंक : 1424 "मयंक का कोना" पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने.....

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  3. bahut aabhaar mayank daa

    dhanyavaad sushma ji

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  4. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

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