Friday, November 8, 2013

अभी तो बस शुरू हुआ है सफर



अभी तो बस, शुरू हुआ है सफर देखते रहो,
कि जब तलक ना हो कोई भी असर देखते रहो !

किनारे से नहीं आयेगी नज़र देखते रहो,
समंदर मे अब तुम भी उतर देखते रहो !

कुछ एक कूचा ,कूच एक डगर, बदल गये तो क्या,
अभी तो बदलेगा ये सारा शहर देखते रहो !

कई पर्दे , कई धूल , रोकेंगे अभी रास्ता,
संभाल कर ये अपनी आँखें मगर देखते रहो !

कहाँ कहता था मैं कभी ऐ मेरे हमदम,
कि मैं जो देखूँ तुझे तुम भी इधर देखते रहो !

कुछ एक नज़्म के दिये जले फिर काग़ज़ों पे आज,
यही है "नील" का छोटा सा इक घर देखते रहो !

Friday, November 1, 2013

न बुझाओ गम -ए -चिराग मयकदा जाकर !

न   जियो  गफ़लत  में  ,दिल  को रौशन कर लो

ख्वाब   सजाकर   खुद   को गुलशन    कर लो !!

नज़रों     में   न   तुम अक्श    को ढूँढा   करना  
महसूस   करो   रूह    को,उसे   दर्पण   कर लो!!

न  बुझाओ  गम -ए  -चिराग  मयकदा  जाकर  
खुशियों  के नगमो  में , उन्हें  दफ़न  कर  लो !! 

दिये - बाती  को मशालों   से  क्यूँ  तौलते  हो 
सिर्फ  अँधेरा मिट जाए   ,तुम  जतन   कर लो!!


तौफीक हथेली के लकीरों से नहीं मिलती "नील" 
कोशिशें आज  दिल-ओ-जान से दफतन कर लो !!