Sunday, January 4, 2015

मेहरबान


कल रात  चमकते मोती दिखे 
खुले संदूक में  छोर गया था मेहरबान 

नींद टूटी  तो खिड़की के शीशे पर ओस चमका सूरज हंस रहा था !!

2 comments:

  1. वाह क्या बात है ... नव वर्ष होगा ... मुबारक हो ....

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