Friday, March 6, 2015

भला कौन करता है यकीन आजकल


भला कौन करता है यकीन आजकल
इंसान बन गया है मशीन आजकल

रंजिशें मिटती थी  कभी ईद पर 
क्यूँ लाल हो गयी ज़मीन आजकल 

रिश्ते नाते जल गए किस आग में 
ये  बंदगी भी है संगीन आजकल 

चाँद सिक्कों के लिए सब बिकते हैं
दौलत वाले हैं नाजनीन आजकल 

इस शहर में ये कैसी मुफलिसी है
जो नदिया भी हुई नमकीन आजकल 

मेरी हाल पे लोगों ने दिलासा  दिया
तू तो लिख रहा है बेहतरीन आजकल 

खौफ्फ़ है की कोई अब बोलता नहीं 
क्यूँ  लोग हैं बस तमाशबीन आजकल 


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Kshitiz

Wo kshitiz hai paas nahi aata, Jaise sach ho ,jo raas nahi aata Tum aaye the lekar Josh -o -junoon, Ab kya hua,kahte ho kaash nahi aata !...