Tuesday, June 7, 2016

तश्वीर

इक रँग का इख्तियार ,इक रँग का गुरूर
कल जाने वो तश्वीर रास आये ,न आये

तश्वीर सौंपता है साहिल के रेत को
सोचे है ये कि लहर पास आये न आये

3 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 9-6-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2368 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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