Sunday, February 28, 2016

मुसाफ़िर

ईधर  जाऊँ , उधर जाऊं ,कहो कैसा सफर कर लूँ 
कई तो हैं तमाशे अब ,कहो कैसी नज़र कर   लूँ 

मुझे मिट्टी  ही प्यारी है,भले मैं   हूँ तेरा मज़दूर 
कहो  क्यों ए ज़मीं वाले , खुद को बेहुनर  कर लूँ 

मैं खामोश रह लूँगा ,फिर भी साँस  जब  लोगे
न तब भूल  पाओगे   ,खुद को जो शज़र  कर लूँ 

 मुझे मालूम है फिर आसमाँ का  रंग क्या होगा 
 परिंदा  हूँ,भरोषा पँख पर खुद के, अगर कर लूँ

कल, सूरज  !, न  जाने कौन सी ,धूप लाये "नील"
मुसाफ़िर हूँ ,हर रास्ते  को हमसफ़र कर कर लूँ

Saturday, February 27, 2016

हमें चलना था

जो ठीक लगता है कह देते हो 
जैसे शतरंज हो ,और शह देते हो 

क्यों छीन लेते हो तुम रात को 
जब रोशनी  तुम सुबह देते हो 

हमें चलना था ,हम चलते रहे 
तुम पथरीली सतह देते हो 

मैं   भूल जाऊँ ,तुम्हे परवाह नहीं
पर याद रखने की वजह देते हो

Monday, February 1, 2016

रात आयी है !


रात  आयी  है   ,
चाँद  भी  सो  गया  है  ,
बादल  को  ओढ़  कर.. 


चलो  ,सूरज  की  लाली  को  देखने  ,
ख्वाब  में  खो  जाते  हैं...


कल  खिड़की  के  शीशे   पर  पड़ी  ओस  की  बूँदें  को  
जब  सूरज  की  किरणे   छू  जायेंगी  
तो    हमारे   पास   भी  
बेमोल    मोतियों   का   खजाना   होगा..  


और    जब  बादलों  रोयेंगे  
अपने    चाँद  से    बिछड़ने   वक़्त   कल   सुबह  
तब  
उस  प्रेम  भरी  बारिश  में  तुम  बागीचे  में  नहा  लेना .....


और  दिन  की  शुरुआत  करना  .....

कलाकार


कलाकार  मरा  नहीं  करते  ,वो  जिंदा  करते  हैं  हर पल हमारा  वजूद
उनके  नगमे ,अंदाज़ , कुछ  गीत  ,कुछ  साज़  ,रहते  हैं  हरदम  मौजूद !!

जीते हैं अपने जिद्द में और छोर चले जाते हैं  राहों पर अपनी निशानियाँ 
चलते हैं बेख़ौफ़ कितने ही कारवां ,मिलती है कितनो को मनमाफिक दुनिया !!

मीठे नींद को ठुकरा वो जागते हैं सुनी रातों में भी रौशन करने हमारे दिल को 
हम जलाया करते हैं चिराग उन्ही के बनाये के रौशन करने अपने महफ़िल को !!

वो खुदा नहीं  हो पर खुदा की ओर जाने वाली राह  दिखा  ही देते हैं 
एक काफिर  इंसान को भी वो मेहरबान उस  खुदा का बना  ही देते हैं !!

आज ये चंद लफ्ज़ उन्ही के नाम  अपने कलम से लिख देता हूँ 
आज उनके एहसान मुझपे भी हैं उन्हें दिल-ओ -जान से कह देता हूँ !!