Monday, April 10, 2017

जो आईना सा है

किस बात से खफा थे सब ,ये मालूम है
मैं अकेला और पीछा करता हुजूम है

खामोश है मेरी तरह जो बीते कल की तरह ,
जो आईना सा है मेरा ,वो ही मासूम है

दो बूँद माँगता था वो  ,पर जिंदगी की दोस्त
दे दी आपने क्या शोहरत,क्या वो मज़लूम है ?

देखेंगे हम ,है अभी कयामत का वक्त दूर ,
कौन हैँ  मायूस और किनकी धूम है

Saturday, April 8, 2017

आवाज

हर नजर में है बेचैनी ,हर नजर का इशारा भी ,
ये  कहते  हैँ  मैं उनका हूँ ,वो कहते हैँ हमारा भी

जिस राह की कहानी तुमको अभी सुननी है ,
उस राह पर वो चला भी ,उस राह पर हारा भी

सुनते हो ,सुनाते हो ,आवाज का शहर है ,
इक बार कभी सोचो ,तुम्हे हमने पुकारा भी

Saturday, April 1, 2017

चासनी !!

चासनी बेचने वाला अब दिखाई नहीं देता 
उसे नीम चखाने की आदत लग गयी थी 

अब दूकान पर चींटियों का बसेरा है!

Monday, March 13, 2017

रँग

चुपचाप   सा  रह  जाना ,आपके  मामूल  क्यूँ  हैँ ,
जो  सब  होता  हो  ये  आपको  माकूल  क्यूँ  हैँ

किस  रँग  के  उतर  जाने  की  बात   करते  हैँ ,
रँग  देखने  में  भला इतने  मशगूल  क्यूँ  हैँ

कितनी  नज़्मों  में  हमारा  ज़िक्र  आया  था ,
बस  चंद  हर्फ़  हि  आपको   मक़बूल  क्यूँ  हैँ

ये  तो  पाँव  के  निशाँ  थे  दौर -ऐ -सफर  में , देखिए ,
फिर  नज़रिये  में  ये  रास्ते  के  धूल  क्यूँ  हैँ

अजूबे

पानी के रँग में डूबे हैँ ,कौन पहचाने
सब सफर में हैँ और  ऊबे हैँ ,कौन पहचाने

चंद गलियों के अफ़साने ,सुनाया करते
इस जहाँ में क्या अजूबे हैँ ,कौन पहचाने