कविता, नज्म, गजल
हम जो चुप रहे तो फिर हमारी खता समझ गए, हम बहुत ज़ल्द ,इधर का, कायदा समझ गए। आप थे ख़ामोश जब हुई पेशगी अपनी वहाँ,, कुछ इस तरह की बात थी, हम...