कब तक ये झूठी सी अना रखोगे
कभी तो पस-ए-आईना रखोगे !!
वो पूछते हैं क्यों फ़ना रखोगे
तो, ईश को कब तक मना रखोगे ?
कैसे होगी जीत बाज़ी की तब,
जब दाँव अपना बेमाना रखोगे !!
रोम रोम सब के सुन ही लेंगे,
जब सिंह सी तुम गर्जना रखोगे
"नील" सुनता ही नहीं है नभ अब,
अब और क्या संवेदना रखोगे