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दायरा
हम जो चुप रहे तो फिर हमारी खता समझ गए, हम बहुत ज़ल्द ,इधर का, कायदा समझ गए। आप थे ख़ामोश जब हुई पेशगी अपनी वहाँ,, कुछ इस तरह की बात थी, हम...
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उसके गीतों के ज्वाला ने लोहा तक पिघलाया था सोये भारत मन में भी एक नवसंचार जगाया था उसके कलम में वीरों के शहादत का प्रतिशोध था भारत माता...
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सागर से मिलने से पहले नदियों का विस्तार तो देख, मिट जाने से पहले अपने होने का आधार तो देख कुदरत है आँखों के आगे, कुदरत है मन के भीतर भूल ...

सुंदर अभिव्यक्ति..
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