Tuesday, September 15, 2026

फर्ज

किया जो फर्ज था पर, इनाम उसमे ढूंढेंगे 

धूप लाजिम है, नसीम-ए-शाम उसमे ढूंढेंगे

 

जो डायरी लिखोगे, अपना नाम उसमे ढूंढेंगे 

हम तो शायर हैं ,बस कलाम उसमे ढूंढेंगे

 

बहुत शिद्दत से निभाया है उसने रिश्ता, 

ऐब कुछ लोग ,सर-ए-आम उसमे ढूंढेंगे

 

मदद ही कर रहे थे, कमी कहाँ निकाली 

नहीं मालूम था वो इल्जाम उसमे ढूंढेंगे

 

नफे की बात न कर, है रब का घर साहब 

आप अपना काम ढूंढें, हम राम उसमे ढूंढेंगे

  

अगर सागर में ही ढूंढना है "नील" मोती को, 

भले हो जाएँ हम नाकाम, उसमे ढूंढेंगे

3 comments:

  1. वाह्ह बहुत बढ़िया।
    सादर।
    -------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १८ सितंबर २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    ReplyDelete
  2. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

    ReplyDelete

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