Thursday, August 8, 2013

रस्ता दिखाए हम

हर  वक़्त  आरज़ू  रहेगी  ..की  लौट  आयें  हम 
रूह  से   लिखी  नगमों  की  माला  बनाए  हम 

ज़माने  की  हर  रंग  से  हम  खेल  ही चुके  हैं 
आज  सतरंगी  सपनो  की  दुनिया  बसाए   हम 


जब  मन  में  ही  है  इश्वर  का  ठौर  दोस्तों 
तो  बेवजह  मंदिर  भला   क्यूँ  जाए  हम



फिर  आये  न  आये  ये  रुत  गाने  बजाने  की
आज  फिर  इक   खुशनुमा   नगमा  सुनाये   हम 



कोई  राहगीर  थक  न  जाए  इस  ज़माने  में 
उसको  भी  मंजिल  का इक  रस्ता दिखाए  हम 







Thursday, August 1, 2013

नास्ता

तीखा  मीठा  खट्टा  नास्ता
भुना  चना  या  भुट्टा  खास्ता !!

बताइये  आप  अपनी  फरमाइशें
हम  दिखायेंगे  ताज  का रास्ता !!

वहाँ  मिलेंगे  आलू  के  दम
और  मीठे  में  होंगे  रस कदम !!

नहीं  रहेगा  चाय   अकेला
रहेगा  पकवानों  का  मेला !!

आप  खायेंगे   ,सब  खायेंगे
अच्छे  अच्छे   पौष्टिक  नास्ता !!

तीखा  मीठा  खट्टा  नास्ता
भुना  चना   या  भुट्टा  खास्ता !!

Kshitiz

Wo kshitiz hai paas nahi aata, Jaise sach ho ,jo raas nahi aata Tum aaye the lekar Josh -o -junoon, Ab kya hua,kahte ho kaash nahi aata !...