Saturday, February 1, 2014

अधलिखा किताब


इक   अधलिखा  किताब  रात  भर  जागता  है 
सुबह के इंतज़ार में बस सन्नाटे   को  सुना करता है 


जब  इंतज़ार  ख़त्म  होती  है  तो   पहली   किरण   एक  और पन्ना   भर  देती  है  चुपके  से ...

No comments:

Post a Comment

दोहे

पके   आम   के  संग -संग   रेशे  भी   होवत    आम   उतना  ही  रसपान  करें  जिससे   मिले   आराम   लीची   मीठी    होवत   है  पर बीज    कसैला  ...