Monday, May 1, 2017

रब को दिल में ही अपने बसाया करना !!

तुम  यूँ  पत्थर  न  कभी उठाया  करना 
एक पल में  किसी को न  पराया  करना !!



तेरी साँसे पलती हैं कई साँसों से 
उनके एहसान कभी न भुलाया करना !!


देखो गुलाब भी काँटों को भी संग रखता है 
दिल में दर्दों को वैसे ही  छुपाया करना !!

ओस की बूंदे हर सुबह जैसे खो जाती हैं
जुदाई को तुम भी  अपनाया करना !!

तिनके-तिनके की कीमत है राही 
किसी बुलबुल के घरौंदे को न मिटाया करना !!



भटक जाते हैं लोग यहाँ  शहरों में 
उन्हें रास्ता घर का दिखाया करना !!

कब गुरबत्त  आ जाए तेरे गुलशन में 
अपने ईमान को हमेशा बचाया करना !!

गुलशन जैसे महकते हैं गुल से शायर 
ख़्वाबों से रूह को  तुम सजाया करना !!


क्या मंदिर क्या मस्जिद क्या गिरिजे 
रब को दिल में ही अपने बसाया करना !!




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Kshitiz

Wo kshitiz hai paas nahi aata, Jaise sach ho ,jo raas nahi aata Tum aaye the lekar Josh -o -junoon, Ab kya hua,kahte ho kaash nahi aata !...