Monday, April 10, 2017

जो आईना सा है

किस बात से खफा थे सब ,ये मालूम है
मैं अकेला और पीछा करता हुजूम है

खामोश है मेरी तरह जो बीते कल की तरह ,
जो आईना सा है मेरा ,वो ही मासूम है

दो बूँद माँगता था वो  ,पर जिंदगी की दोस्त
दे दी आपने क्या शोहरत,क्या वो मज़लूम है ?

देखेंगे हम ,है अभी कयामत का वक्त दूर ,
कौन हैँ  मायूस और किनकी धूम है

No comments:

Post a Comment