Thursday, March 1, 2018

हिन्दुस्तान की आवाज़ !!!!

आज पुकारता है तुझको फिर से आसमां हिन्दुस्तान का
मुकम्मल जहाँ की तलाश में है ये कारवां हिन्दुस्तान का !!

समुंदर की लहरों में घिरा वो माझी खड़ा इंतज़ार में
आज बैठा है क्यूँ गुमसुम हर इन्सां हिन्दुस्तान का!!

जहाँ अब होती है बस बातें गुल औ गुलफाम की
कल वहाँ इन्कलाब ही था एक जुबां हिन्दुस्तान का!!

 शान-ए-तिरंगे को रखना है महफूज़ तुझको अगर
परवाना बन जा बिस्मिल सा ,और हो शम्मा हिन्दुस्तान का !!

ताजपोशी दे दी तख़्त-ए-फांसी पर झूलकर अपनी आन में
उनकी शहादत से ही है नाम-ओ -निशाँ हिन्दुस्तान का !!

अमन- औ -चैन की गर करनी हो तुमको बातचीत
मत बनाना काफिरों को रहनुमा हिन्दुस्तान का!!

5 comments:

  1. उम्दा


    मजे की बात तो ये है कि काफ़िर कौन?

    ReplyDelete
    Replies
    1. dhanyvaad ji ,
      qaafir wahi jo bhatak gaye hain aur unase bhi bade wo jo doosro ko bhatka rahe hain, der na ho jaaye kahin

      Delete
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (01-03-2017) को "जला देना इस बार..." (चर्चा अंक-2897) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (02-03-2017) को "जला देना इस बार..." (चर्चा अंक-2897) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    रंगों के पर्व होलीकोत्सव की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete

दोहे

पके   आम   के  संग -संग   रेशे  भी   होवत    आम   उतना  ही  रसपान  करें  जिससे   मिले   आराम   लीची   मीठी    होवत   है  पर बीज    कसैला  ...