Sunday, July 15, 2012

काग़ज़ को भरने दीवाने पागल आये

सावन  आया  या  ख़्वाबों  के  बादल  आये ,
काग़ज़  को  भरने   दीवाने  पागल   आये 

हमने  आज  गाड़ीवानो  को  रुसवा  किया 
यारों  दिलदारों  से  मिलने  को  पैदल  आये 

हो  जाए  न  कोई  कसूर ,महफ़िल  न  हो  रुसवा
छुपाकर  दिल   में  तश्वीर  निकल  आये

ये  न  कहो  की  मेरा  अज़ीज़  भी  कर  गया तन्हा
यादों  में  साथ  देने    वो   पल  पल   आये

ले  के  गए  नील  आँखों  में  इक  तीरगी
कब  हो  गया  जादू  ,दीपक  सा  हम  जल  आये 

Sunday, July 1, 2012

सिर्फ मेरा नाम लिख देना

इक  बेनाम   चिट्ठी  में  सभी  जवाब  लिखता  हूँ 
तू  पढ़  लेना  ,मगर  दिल  से  ,दिल  की  बात  कहता  हूँ 

तू  जवाब  में   जाना  ,सिर्फ  मेरा  नाम  लिख  देना 

झंडे


आज  धुआ  नहीं  निकल  रहा  पड़ोस की रौशनदान  से 
कल  चौराहे  पर  लकड़ियों  का  ढेर  देखा  था 


वहाँ  कई  झंडे  लहरा  रहे  थे   मशाल  लेकर !