Saturday, March 16, 2019

Wahi baat

Wahi baat fir  dohra ke to dekho,
Jahaan se chale ,wahin jaa ke to dekho

Khalish,dhool,shaq sab hataa ke to dekho
Nazar se nazar apne milaa ke to dekho

Syaahi se kaaghaz naaraz kyun hain,
Kalam se ye maslaa bata kar to dekho

Har ik harf me hai ghazal "neel" teri
Tum ik harf ko dil se gaa ke to dekho

Sunday, February 10, 2019

धुन

वो मौसम  सा नहीं ,एक सवेरा  है 
शाम ढलने तलक ही हो ,  वो मेरा है 

धुन मुझे मेरा  ही ले जाए दूर कहीं ,
मन को रोके हुए वो  एक  सपेरा है 

जाने किस किस पत्थर को  हटायें यारब ,
हर सू उलझन है ,हर सिम्त बखेरा है 

ढूँढ लेना आते हो जिन राहों से ,
अपनी अक्सों को मैंने वहाँ बिखेरा है 

है अकेला नहीं ,शायर है ,कोई कह दो 
"नील" के घर में गज़लों का बसेरा है 

Tuesday, January 1, 2019

हैं हम जूनून-ए-हिंद



बाकी  है  अभी जीने   की  ललक
ललचा न ए दूर खड़ी बेदर्द फलक    

तू सूरज की लाली को छूपा  बैठी है 
तो हम रक्त से अपनी माटी को सींचा करते हैं !!

चाँदनी ऐसे न सता हमें तू  आकर ,देख वहां बस्ती में अँधेरा है 
हम वहां शमा रोज़ जलाया  करते हैं !!

ए बादल तू बेमौसम बरस न इतराया करना 
हम राह गुज़र की प्यास बुझाया करते हैं !!

ए समुंदर तू लहरों से क्यूँ खेलता है 
हम ख़्वाबों से मोती निकाला करते हैं !!

तेरे मोती हैं दूर बहुत गाँव से 
हमारे गीतों की माला वहां के हर लाल  गाया करते हैं !!


हरे हो गए हैं अब सारे सपने ,घास पर नंगे कदम रखते रखते 
ए साख गुलशन के न वहम कर ,हर मौसम हम लहलहाया करते हैं !!

 जब तलक इस सांस की सिसकियाँ हैं 
खुली हमारे दिल की खिड़कियाँ हैं !!

आ जाओ हम ख्वाब बनाया करते हैं 
आ जाओ हम पर्वत को दहलाया करते हैं !!

हैं हम जूनून-ए-हिंद  , तमन्ना अपनी घर छोरे आये हैं 
हम तुम्हे चैन से सोने के खातिर  ,रोज़ खुद  को जगाया  करते हैं !!

हम ख्वाब बनाया करते हैं ,हम ख्वाब बनाया करते हैं!! 

Sunday, December 23, 2018

मगर न हो सका

पत्थरों के  दरमियाँ  उगे हुए  इन घास  पर
ज़िन्दगी चल रही है  जाने किस किस आस पर

सो गया था जाने  वो किस बात के अंदाज़ से ,
जागता है जाने अब  किस  फिक्र के एहसास पर 

तुम छुपाना  चाहते  थे ,मगर न हो सका
तेरा ही खूं   ढूँढे  तुझे , अब तेरे लिबास  पर









Friday, December 21, 2018

इक ओस की औक़ात

बहके हुए ज़ज़्बात ले कर ,आए हो मिलने
कभी सुबह कभी रात ले कर ,आए हो मिलने

मैं सुबह की धूप में था मुंतजिर तेरा ,
जुगनू की ये बारात ले कर ,आए हो मिलने 

तिनको की कीमत आप पंछी से पूछ लो ,
तूफ़ान की जो बात ले कर ,आए हो मिलने

करते थे बारहा तुम दरिया का जिक्र "नील "
इक ओस की औक़ात ले कर ,आए हो मिलने

Saturday, December 1, 2018

दोहे

पके   आम   के  संग -संग   रेशे  भी  होवत   आम  
उतना  ही  रसपान  करें  जिससे  मिले  आराम  

लीची   मीठी   होवत  है  पर बीज   कसैला  होए   
सीचन  कर  देखो  ज़रा  फल  कितना   सुंदर   भये

बांस   होवत  कठोर है पर गुण होवे हैं निराले 
काट  छांट  जो  छोटा   किये ,मधुमय  सुर  निकाले 

Saturday, November 24, 2018

accha lagta hai

Tumse milkar tum saa hona accha lagta hai,
Khud se milkar ,khud saa rahna accha lagta hai!

Kaise nadiyon ne joda hai shaharon ko dekho,
thakta hoon par bahta rahna accha lagta hai ..

gairon se sunta hoon to bas gardan jhuk jaaye,
Tu jo kah de mujhko apna,accha lagta hai ..

Gairon ke aaine patthar sab ko naamanzoor,
Khud ka patthar-o-aaina,accha lagta hai !

aise naamabar naa dhoondho jo kah den aake,
neel tumhaare ghar ka rasta,accha lagta hai?

Wahi baat

Wahi baat fir  dohra ke to dekho, Jahaan se chale ,wahin jaa ke to dekho Khalish,dhool,shaq sab hataa ke to dekho Nazar se nazar apne mil...