Friday, August 30, 2019

अलग

रात कोई और ,सुबह और ,धूप छाँव अलग
अब मेरे लोग अलग ,देश   अलग ,गाँव अलग

खेल  जो खेलते   हो मैं भी था माहिर  जहाँ ,
पर मेरे ढँग अलग और तुम्हारा  दाँव अलग

राह ही राह ,मंजिल पे ले जायेगी कौन ,
"नील " मेरा जेहन कहीं और ,मेरे पाँव अलग

Wednesday, May 1, 2019

निशाँ छोड़े जाएंगे


जहां  रब  ले  जाए  ,चले  जायेंगे  ...
दीवाने  हैं ,वादा  ज़रूर  निभायेंगे
मिली  मंजिल  तो  ठीक  ,उसकी  मर्ज़ी ,
न मिली तो  राहों पर सच्चे  निशाँ छोड़े  जाएंगे

Saturday, March 16, 2019

Wahi baat

Wahi baat fir  dohra ke to dekho,
Jahaan se chale ,wahin jaa ke to dekho

Khalish,dhool,shaq sab hataa ke to dekho
Nazar se nazar apne milaa ke to dekho

Syaahi se kaaghaz naaraz kyun hain,
Kalam se ye maslaa bata kar to dekho

Har ik harf me hai ghazal "neel" teri
Tum ik harf ko dil se gaa ke to dekho

Sunday, February 10, 2019

धुन

वो मौसम  सा नहीं ,एक सवेरा  है 
शाम ढलने तलक ही हो ,  वो मेरा है 

धुन मुझे मेरा  ही ले जाए दूर कहीं ,
मन को रोके हुए वो  एक  सपेरा है 

जाने किस किस पत्थर को  हटायें यारब ,
हर सू उलझन है ,हर सिम्त बखेरा है 

ढूँढ लेना आते हो जिन राहों से ,
अपनी अक्सों को मैंने वहाँ बिखेरा है 

है अकेला नहीं ,शायर है ,कोई कह दो 
"नील" के घर में गज़लों का बसेरा है 

Tuesday, January 1, 2019

हैं हम जूनून-ए-हिंद



बाकी  है  अभी जीने   की  ललक
ललचा न ए दूर खड़ी बेदर्द फलक    

तू सूरज की लाली को छूपा  बैठी है 
तो हम रक्त से अपनी माटी को सींचा करते हैं !!

चाँदनी ऐसे न सता हमें तू  आकर ,देख वहां बस्ती में अँधेरा है 
हम वहां शमा रोज़ जलाया  करते हैं !!

ए बादल तू बेमौसम बरस न इतराया करना 
हम राह गुज़र की प्यास बुझाया करते हैं !!

ए समुंदर तू लहरों से क्यूँ खेलता है 
हम ख़्वाबों से मोती निकाला करते हैं !!

तेरे मोती हैं दूर बहुत गाँव से 
हमारे गीतों की माला वहां के हर लाल  गाया करते हैं !!


हरे हो गए हैं अब सारे सपने ,घास पर नंगे कदम रखते रखते 
ए साख गुलशन के न वहम कर ,हर मौसम हम लहलहाया करते हैं !!

 जब तलक इस सांस की सिसकियाँ हैं 
खुली हमारे दिल की खिड़कियाँ हैं !!

आ जाओ हम ख्वाब बनाया करते हैं 
आ जाओ हम पर्वत को दहलाया करते हैं !!

हैं हम जूनून-ए-हिंद  , तमन्ना अपनी घर छोरे आये हैं 
हम तुम्हे चैन से सोने के खातिर  ,रोज़ खुद  को जगाया  करते हैं !!

हम ख्वाब बनाया करते हैं ,हम ख्वाब बनाया करते हैं!! 

Sunday, December 23, 2018

मगर न हो सका

पत्थरों के  दरमियाँ  उगे हुए  इन घास  पर
ज़िन्दगी चल रही है  जाने किस किस आस पर

सो गया था जाने  वो किस बात के अंदाज़ से ,
जागता है जाने अब  किस  फिक्र के एहसास पर 

तुम छुपाना  चाहते  थे ,मगर न हो सका
तेरा ही खूं   ढूँढे  तुझे , अब तेरे लिबास  पर









Friday, December 21, 2018

इक ओस की औक़ात

बहके हुए ज़ज़्बात ले कर ,आए हो मिलने
कभी सुबह कभी रात ले कर ,आए हो मिलने

मैं सुबह की धूप में था मुंतजिर तेरा ,
जुगनू की ये बारात ले कर ,आए हो मिलने 

तिनको की कीमत आप पंछी से पूछ लो ,
तूफ़ान की जो बात ले कर ,आए हो मिलने

करते थे बारहा तुम दरिया का जिक्र "नील "
इक ओस की औक़ात ले कर ,आए हो मिलने

अलग

रात कोई और ,सुबह और ,धूप छाँव अलग अब मेरे लोग अलग ,देश   अलग ,गाँव अलग खेल  जो खेलते   हो मैं भी था माहिर  जहाँ , पर मेरे ढँग अलग और तुम्...