Monday, February 1, 2016

रात आयी है !


रात  आयी  है   ,
चाँद  भी  सो  गया  है  ,
बादल  को  ओढ़  कर.. 


चलो  ,सूरज  की  लाली  को  देखने  ,
ख्वाब  में  खो  जाते  हैं...


कल  खिड़की  के  शीशे   पर  पड़ी  ओस  की  बूँदें  को  
जब  सूरज  की  किरणे   छू  जायेंगी  
तो    हमारे   पास   भी  
बेमोल    मोतियों   का   खजाना   होगा..  


और    जब  बादलों  रोयेंगे  
अपने    चाँद  से    बिछड़ने   वक़्त   कल   सुबह  
तब  
उस  प्रेम  भरी  बारिश  में  तुम  बागीचे  में  नहा  लेना .....


और  दिन  की  शुरुआत  करना  .....

2 comments:


  1. आपने लिखा...
    और हमने पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 05/02/2016 को...
    पांच लिंकों का आनंद पर लिंक की जा रही है...
    आप भी आयीेगा...

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  2. वाह...बहुत ख़ूबसूरत और भावमयी अभिव्यक्ति...

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