Saturday, October 13, 2012

बस कलम तेरा


मेरे वास्ते बचा क्या था बस कलम तेरा ,
काग़ज़ में छुपा के रखूँ अब मरहम तेरा 

रोज़ बस एक ही सवाल करती है कलम ,
की मेरी स्याही पे निशार हो कदम तेरा 

धुल में लिपटे हुए पन्ने को उठा कर लिख दे ,
देर तक संभालेंगे किताबों में परचम तेरा 

मेरे हर्फ़ यहाँ साज बन गए और राह तकें
बेजुबां हो न जाएँ ,ढूंढते हैं सरगम तेरा

यूँ तो हर चीज़ की है कीमत ,मगर सोच लूं
कि मेरी नज़्म क्या दे पाऊंगा मैं रकम तेरा

पतझड़ ,सावन ,बहार ,जेठ बदल जाते हैं,
मगर बदलता नहीं है याद का मौसम तेरा

तू कोई चाँदनी नहीं जो कम हो जाए पल में ,
मुझको मंज़ूर नहीं चमकना कम तेरा

वही सागर ,वही साहिल ,वही लहरों की सड़क ,
चल रहा है सफ़र पे जहाज़ मद्धम तेरा

जिस तरह सहर की रुत में हर दिन ओस खिले
उस तरह ही लगे हर घड़ी शबनम तेरा

ये ग़ज़ल भी दे देगी शेख दो बूँद भर जां,
भूल आयें हैं इसी खातिर दैर -ओ -हरम तेरा

वो उभर आता ही है तश्विरों में अब देख लें ,
नील स्याही में जो भर लेता हूँ ग़म तेरा

19 comments:

  1. वाह...
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (14-10-2012) के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

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  2. बहुत आभारी हूँ आपका मयंक दा
    शुक्रिया वनीत जी
    शुक्रिया प्रतिभा जी

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  3. वो उभर आता ही है तश्विरों में अब देख लें ,
    नील स्याही में जो भर लेता हूँ ग़म तेरा....बहुत सुन्दर, आभार

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  4. बहुत खूब लिखा है आपने |

    इस समूहिक ब्लॉग में आए और हमसे जुड़ें :- काव्य का संसार

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  5. यूँ तो हर चीज़ की है कीमत ,मगर सोच लूं
    कि मेरी नज़्म क्या दे पाऊंगा मैं रकम तेरा ...वाह

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  6. नील स्याही में जो भर लेता हूँ ग़म तेरा....बहुत सुन्दर

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  7. अरविन्द जी ,प्रदीप जी ,रश्मि जी,संजय जी बहुत आभारी हूँ आपका
    धन्यवाद
    सादर

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  8. वाह बहुत सुन्दर रचना हर शब्द अपने मायने खूबसूरती से समझाता हुआ |

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  9. सुन्दर ग़ज़ल लिखी है प्रिय नीलांश ब्लॉग जगत में स्वागत है जुड़ गई हूँ आपके ब्लॉग से मेरे ब्लॉग पर स्वागत है आपका http://hindikavitayenaapkevichaar.blogspot.in

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  10. bahut hi badhiya gajal..
    shandaar..
    behtarin.....
    :-)

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  11. http://bulletinofblog.blogspot.in/2012/10/blog-post_14.html

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  12. वाह....
    बेहद खूबसूरत गज़ल नीलांश.
    वही सागर ,वही साहिल ,वही लहरों की सड़क ,
    चल रहा है सफ़र पे जहाज़ मद्धम तेरा ..
    बहुत बढ़िया शेर कहे है...

    अनु

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  13. बहुत सुंदर...बधाई हो

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  14. पतझड़ ,सावन ,बहार ,जेठ बदल जाते हैं,
    मगर बदलता नहीं है याद का मौसम तेरा
    बहुत सुन्दर गज़ल

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  15. meenakshi ji,rajesh ji,reena ji,rashmi ji,anu ji,rashmi ji,vandana ji aapka saadar aabhaar
    rashmi ji blog bulletin me sammilit kar ke gauravaantit karne ka bahut aabhaari hoon

    saadar

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  16. kya khub likha bhai bhai, aapke sabdo ka pahad humesa badhta jaye yahi kamna karte hai..

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