Wednesday, May 2, 2012

उखरी उखरी नाराज़ है आज की रात


उखरी उखरी नाराज़ है आज की रात ,
बिन तेरे दर्श बे -अल्फ़ाज़ है आज की रात


ऊँचे ऊँचे गगन से सपने हैं मगर
एक अनसुनी सी नियाज़ है आज की रात 


खो गया मेरा वजूद मेरे सायों में
किसी और की ही मिजाज़ है आज की रात


धड़कने ,साँसें ,हि हैं इस रूह के लिए
तन्हाइयों की साज है आज की रात


कहती है मैं फिर आउंगी सूरज ढले
जाने कितनी सरफ़राज़ है आज की रात .....
 
 

1 comment:

  1. खो गया मेरा वजूद मेरे सायों में
    किसी और की ही मिजाज़ है आज की रात...बेहतरीन ग़ज़ल...

    ReplyDelete

Wahi baat

Wahi baat fir  dohra ke to dekho, Jahaan se chale ,wahin jaa ke to dekho Khalish,dhool,shaq sab hataa ke to dekho Nazar se nazar apne mil...