Monday, January 2, 2012

उसके पतंग की डोर टूट गयी है 
बहुत नौसिखिया पतंगबाज था वो ...

आज दूर किसी मोहल्ले में फिर किलकारियां गूंजेगी... 

3 comments:

  1. दस दिनों तक नेट से बाहर रहा! केवल साइबर कैफे में जाकर मेल चेक किये और एक-दो पुरानी रचनाओं को पोस्ट कर दिया। लेकिन आज से मैं पूरी तरह से अपने काम पर लौट आया हूँ!
    नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

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