Thursday, April 21, 2011

वो एक इन्द्रधनुष देखा मैंने

वो एक इन्द्रधनुष देखा मैंने 
देखा उसके कई रंगों को 
खो गया मैं उन रंगों में 
देख न पाया की वो है एक  बाह्य आवरण 
फिर उतारा उसको मैंने अपने जीवन में 
सब ने अपने रंगों को चाहा
पर किसने देखा की वो रंग 
बने हैं सच्चे मन के मंथन से 
जिसने देखा जैसे मन से 
उसने पाया वैसा रंग 
उन रंगों को समेट ले गया जो 
उसका मंथन किया जो 
उसने पाया मन को निर्मल 
श्वेत रंग  है सबसे शीतल 


1 comment:

  1. उसने पाया मन को निर्मल
    श्वेत रंग है सबसे शीतल
    सच्चाई है , बहुत सुन्दर,बहुत बहुत बधाई

    ReplyDelete

Kshitiz

Wo kshitiz hai paas nahi aata, Jaise sach ho ,jo raas nahi aata Tum aaye the lekar Josh -o -junoon, Ab kya hua,kahte ho kaash nahi aata !...