Saturday, June 25, 2011

पीपल के छाँव में

दिन भर के काम से थका हारा 
पीपल के छाँव में बैठा है वो पथिक ,


ये सोचता हुआ कि
घर पर आज सोना होगा फिर से 
काले आसमान के तले ,

इसलिए सुस्ता लेता है थोड़ी देर 
उसके असंख्य पत्तों को 
रब कि मेहर मान  जो उसे पंखा झूल रहे हैं ,

क्या हुआ जो घर में बिजली नहीं है 
मेहनत की  है तो रब ने ये पीपल को 
लहलहाया है उसके लिए ,

आज बच्चों को कहानी सुनाएगा 
इस पीपल की कोई अच्छी सी ,

वो भी सिख जाएँ मेहनत का अर्थ 
और जीना सिख जायें ...


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