Thursday, June 2, 2011

कारवां को छोड़ना तू नहीं कभी


राह में अकेला नहीं है तू शायर 
तेरे वक़्त के पुराने कागज़ में 
लिखे हुए हैं नाज़ से वो 
ख्वाब तेरे साथ हैं 


फजूल है फिक्र राही 
है बेकार कल में उलझना 
आज जी ले जी भर के 
रब का तुझ पे हाथ है 


कोशिशें नहीं थमनी चाहिए
दिए को जलाने की 
तूफ़ान भी आया तो क्या 
दिल का घरौंदा 
ही तेरा कायनात है


रौशन कर ले उसे 
वक़्त का क्या तकाज़ा 
बस कुछ लम्हे हैं
रूहानी और बस 
उन्ही की बात है 


कारवां को छोड़ना तू नहीं  कभी 
खुदा खुद  जो 
तेरे इस सफ़र में 
तेरे साथ है 


हर शक्स है दीवाना 
हर शक्स तुझ सा ही है 
तू है अलग क्योंकि 
तेरे पाक ज़ज्बात हैं 


उनको कहते जा 
सादगी न छोड़ना कभी 
ये हार  है  न जीत है 
ना ही शह  और ना ही मात है 



कारवां को छोड़ना तू नहीं  कभी 
खुदा खुद  जो 
तेरे इस सफ़र में 
तेरे साथ है 



खुदा खुद जो तेरे इस सफ़र में 
तेरे साथ है ...

5 comments:

  1. राह में अकेला नहीं है तू शायर
    तेरे वक़्त के पुराने कागज़ में
    लिखे हुए हैं नाज़ से वो
    ख्वाब तेरे साथ हैं

    वाह क्या बात है , हां यही तो है साथ जो वर्षों साथ निबाहेगा

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  2. खुदा खुद जो तेरे इस सफ़र में
    तेरे साथ है ...

    -बहुत बढ़िया....

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  3. दास मलूका कह गये, सबके दाता राम!
    --
    रचना बहुत सुन्दर है!

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  4. कारवां को छोड़ना तू नहीं कभी
    खुदा खुद जो
    तेरे इस सफ़र में
    तेरे साथ है... muskilo me ek postive thinking deti hui apki rachna...

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  5. कोशिशें नहीं थमनी चाहिए
    दिए को जलाने की
    तूफ़ान भी आया तो क्या
    दिल का घरौंदा
    ही तेरा कायनात है
    kya baat hai

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Kshitiz

Wo kshitiz hai paas nahi aata, Jaise sach ho ,jo raas nahi aata Tum aaye the lekar Josh -o -junoon, Ab kya hua,kahte ho kaash nahi aata !...