Sunday, October 6, 2019

Guest / मेहमान

दो  राहों  पर  जाकर  करते  हैं खुद  का  पहचान ,
अपनी  राहों  का  रहबर  खुद  बनता  है  इंसान!

काले  बादल  और बिजली  की  आहट  सुन  कर  के ,
चींटी सा  बन  जाये  तो  ,हो  जाये  सब  आसान !

करते  हैं  इस  घर  की  दीवारों  से  सब  प्यार ,
अपने  घर  में  भी  लेकिन  दो  दिन  के हैं  मेहमान

कैसी  फसलों  के  चक्कर  में  पड़   जाते  हो  "नील ",
तेरे  ही  कुछ  कागज़  पर  है  हर्फों  का खलिहान

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