Sunday, May 8, 2011

बोलती तस्वीर !

ढूँढने चला वो 
अपने तस्वीर   को ,


वो तस्वीर 
जो कल की पहचान थी
उसकी ,

और 
खो गया अतीत में ,

एक ख्वाब आया 
और उसे
ले गया 
एक दूर अनजाने
शहर में ,

जहाँ लगी हुई थी
कई तस्वीर 
और बोल रही थी उससे 
कि तू कल कि तस्वीर 
में न उलझ ,

जा देख ले
उन दो आँखों में
अपने प्रत्यक्ष रूप को ,

वो आँखें 
तुझे 
एक अटूट पहचान देगी ,

वो इंतज़ार कर रही है 
तेरा ,

जा ,देर न कर
वरना 
तेरी पहचान हम जैसो 
कि हो जायेगी 
बस बोलती तस्वीर  जैसी ...

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