Saturday, May 21, 2011

दोहा

सहनशील  हो  अंगूर  सा   ,दाब  सहे  जो  यार
किशमिश  बन   मीठा  बने , बढ़  जाये  व्यापार 

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गुरु  घट  के  सामान  है ,महिमा  उनकी  अपार
जिसको  आश्रय  उन्होंने  दीया ,हुआ  शीतल  वो यार 

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जीवन  एक  पतंग  है  ,डोर  प्रभु  के  पास
उड़ते  जा  अनंत  में , ना  होना  कभी  निराश 



8 comments:

  1. जीवन एक पतंग है ,डोर प्रभु के पास
    उड़ाते जा अनंत में , ना होना कभी निराश

    निराशा नहीं, आशा की किरण सदैव अपने पास होनी चाहिए , बधाई

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  2. जीवन एक पतंग है ,डोर प्रभु के पास
    उड़ते जा अनंत में , ना होना कभी निराश
    आशावादी पंक्तियाँ ,आस है तो साँस है ...

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  3. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (23-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  4. अच्छे सन्देश देते दोहे

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  5. शायद आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर भी हो!
    सूचनार्थ

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Kshitiz

Wo kshitiz hai paas nahi aata, Jaise sach ho ,jo raas nahi aata Tum aaye the lekar Josh -o -junoon, Ab kya hua,kahte ho kaash nahi aata !...