Sunday, May 1, 2011

हाँ , क्योंकि वो मजदूर है ...

हथौड़ा  लेकर बढ़ा
वो तोड़ने पत्थर को 
कि   सड़क बन जाए एक 

और जहाँ आने लगे 
कुछ चार पहिये इस ..
गाँव को शहर बनाने ...

हाँ वो मजदूर है 
जिसने ये सब किया ...

और अब वहाँ 
बुलडोज़र बनाने की फैक्ट्री लग गयी है 

अब उस सड़क पर चल 
किसी दो पहिये या फिर  यूँ ही 
उसे शहर जाना होगा ...

क्योंकि वो मजदूर है
और मेहनत करना उसका धर्म ...

हाँ , क्योंकि वो मजदूर है ...


4 comments:

  1. बहुत संवेदनशील प्रस्तुति...

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  2. मजदूर दिवस पर सुन्दर संवेदनशील मानवीय भावना से सराबोर रचना ...

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  3. बहुत सुन्दर लिखा. बधाई.
    आपका स्वागत है.
    दुनाली चलने की ख्वाहिश...
    तीखा तड़का कौन किसका नेता?

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Kshitiz

Wo kshitiz hai paas nahi aata, Jaise sach ho ,jo raas nahi aata Tum aaye the lekar Josh -o -junoon, Ab kya hua,kahte ho kaash nahi aata !...